Monday, December 10, 2012

कल परसों

हम सभी ने ,बहुत प्यार से तुषार की शादी तय की थी .
तुषार कुछ महीने उस लड़की के साथ घूम फिर के .....
इन्कार कर दिया शादी के लिए ......................
            हम सभी सकते में आ गये ,बहुत समझाया
लेकिन तुषार के अन्दर इतनी नफरत हम सभी की समझ
से बाहर थी .....हम सभी चुप ......
           वक्त के साथ समय गुजरने लगा हम सभी ने यह
मन बना लिया था ,जिसे हम ने बहु कम बेटी की तरह ज्यादा
देखा था वह खत्म होने लगा था
          तुषार के इस बदलाव को हम सभी को लगता था ,किसी
ने उस पे टोना -टुटका कर दिया हो ......हम तो उसके माँ -बाप
हम से ज्यादा उसे कौन जाने गा .....
          आगे वाने कल परसों को किसको खबर है तुषार हमारा प्रिय
बेटा  था  ....अब हमें पता नहीं क्यों डर लगने लगा .....उसका जीवन कैसा होगा .

            कुछ सालो बाद तुषार का मन पूजा पाठ में लगने लगा
उसने अपने बाँए हाथ पे शंकर भगवान् का  गुदना -गुदवा लिया था त्रिशूल लिए
आज सुबह जब उसकी आँख   मुझसे कहने लगा पापा ,मैंने एक अजीब सा
सपना देखा .............शंकर भगवान का त्रिशूल मेरे पेट रखा है ......
त्रिशूल का बीच का फल मेरी नाभी पे लगा और मुझे उलटी हो रही है .......

          मुझे एक बात समझ में आयी ....जरुर मेरे बेटे पे किसी ने टोना टुटका किया
था ...............

अब मुझे उस दिन का  इंतजार है जब वह ...............मेरी बहु को  अपना लेगा