सब से सुंदर ,मेरी पोती है,वह अपने पापा पे हूबहू गई है ,वैसी ही शैतानी करती है जैसे रविश बचपन में करता था ,मुझे वह बाबू जी कह के बुलाती है ,कहाँ से सीखा किससे जाना नहीं मालूम,लेकिन मुझे अच्छा लगता है,मैं अपने बचपने में ,पिता जी को बाबू जी कहता था ,हमारा साथ बहुत जल्दी छोड़ के चले गए, सिर्फ बावन साल की उम्र में कहीं अधूरा प्यार उनका था हमारे लिए वह अधूरा ही रह गया ।
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