वजह कुछ नही है ,एक दिन एक पूराने मित्र का फोन आया ,कहने लगा
मुझसे मिलना है ,मैने दो चार दिन बाद का वक्त दे दिया , और कह दिया
फोन कर आ जाना ,और एक दिन फोन किया और कहने लगा,मैं दो बजे
आता हूँ । दोपहर को उसका इन्तजार करने लगा सही समय पर वह आ गया
उस दिन घर पे मेरे अलावा कोई नहीं था । वह मेरा मुस्लिम दोस्त था,वैसे भी
मेरे सब से ज्यादा मुस्लिम दोस्त ही हैं ।मैने उसे बहुत प्यार से बिठाया और
पूछा क्या लोगे ,एक पल वह चुप रहा ,कुछ सोच कर उसने कहा ,कुछ खिला
दो ! मैं असमजस में आ गया खिलाऊँ? कुछ खाना भी नहीं था , याद आया
फ्रीज में दही रखी थी ,मैंने कहा लस्सी लो गे ,पहले वह चुप रहा कुछ पल
रूक के बोला ठीक है । कुछ देर बैठने के बाद चला गया ,उसके जाने के बाद
मुझे एहसास हुआ, एक दोस्त को भूखा ही भेज दिया ।आज भी वह दर्द मुझे
कचोटता रहता है ।

